शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

sampadaikta

लघु कथा    
                                                              समप्रदायिकत
भोलू हाथी मद मस्त हो सडक के किनारे चला जा रहा था ,बीच बीच में रूक कर पेड़ो की पत्तियों को तोड़ कर खा लेता था।तभी भोलू हाथी ने कुछ बच्चों को खेलता देख कर अपने सुंड को हवा मे लहराने लगा , औऱ खुश हो रूक गया।बच्चे हाथी को देख कर तालिया पीटने लगे औऱ उसके पीछे पीछे  हाथी आया हाथी आया का शोर करते हुए चलने लगे।तभी एक बच्चे ने दुसरे बच्चे से कहा " हाथी भगवान होता है इसे प्रणाम करो तो कुछ बच्चे भोलू को प्रणाम करने लगे ,तभी उस में से एक बच्चे ने कहा कि " मैं हिंदू नहीं हू मै तो ईसाई हूँ मैं तो प्रणाम नहीं करूंगा" उस बच्चे की यह बात सुन भोलू हाथी का मन दुख से भर उठा। उसे लगा कि उसके ऊपर बैठा महावत ने पुरी बरछी उसके सिर में घुसेड दिया हो।भोलू यह सोचने लगा कि देखो अब बडो को ही नहीं इस छोटे से बच्चे को धर्म औऱ संप्रदायिकता के जहरीले शिकंजा ने जकड़ लिया है इतने छोटे बच्चे में संप्रदायिकता का ज्ञान है ,लेकिन मासुमियत , भोलेपन ,औऱ निशछल बचपना का नहीं।  अब भोलू हाथी के कदम भारी हो गये थे,उसका पैर दुखने लगा था।

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