बुधवार, 1 अगस्त 2018

शार्दूल के कलम से 22 July at 23:59 · आज पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पुलिस प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था में जिस तरह का भ्रष्टाचार का घुन लगा हुआ था अब इस चौथे स्तंभ को भी वही घुन लग गया है भ्रष्टाचार का सबसे दुखद बात यह है कि प्रेस रिपोर्टर फोटोग्राफर और यहां तक कि संवादाता पुलिस प्रशासन या राजनेताओं के लाइजनर बन जाते हैं अब तो बहुत से प्रेस रिपोर्टर और फोटोग्राफर को खुलेआम प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से दलाली करते हुए देखा जा सकता है दलाली और लाइजनर का जो काम पहले प्रशासन में

आज पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पुलिस प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था में जिस तरह का भ्रष्टाचार का घुन लगा हुआ था अब इस चौथे स्तंभ को भी वही घुन लग गया है भ्रष्टाचार का सबसे दुखद बात यह है कि प्रेस रिपोर्टर फोटोग्राफर और यहां तक कि संवादाता पुलिस प्रशासन या राजनेताओं के लाइजनर बन जाते हैं अब तो बहुत से प्रेस रिपोर्टर और फोटोग्राफर को खुलेआम प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से दलाली करते हुए देखा जा सकता है दलाली और लाइजनर का जो काम पहले प्रशासन में ...
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जमशेदपुर मरता हुआ शहर

जमशेदपुर मरता हुआ शहर
एक समय जब कोलकाता शहर को डायिंग सिटी कहा गया तो बहुत बवाल हुआ था लेकिन आज जमशेदपुर शहर वास्तव में एक मरता हुआ शहर है यहां अब मजदूरों के केवल तालाबंदी छटनी वी आर एस कंपनियों के पलायन आदि के खबरों की सूचनाएं ही आती है लेकिन एक समय ऐसा था कि यह जमशेदपुर शहर लोगों का जीवन की आशा का प्रतीक होता था लोगों को लगता था कि चलो Tata शहर वहां कुछ ना कुछ जीवन यापन का जुगाड़ तो हो ही जाएगा इस आशा में कितने ही लोग दूरदराज के क्षेत्रों से इस शहर में खींचे चले आते थे जमश...
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जमशेदपुर मरता हुआ शहर

जमशेदपुर मरता हुआ शहर
एक समय जब कोलकाता शहर को डायिंग सिटी कहा गया तो बहुत बवाल हुआ था लेकिन आज जमशेदपुर शहर वास्तव में एक मरता हुआ शहर है यहां अब मजदूरों के केवल तालाबंदी छटनी वी आर एस कंपनियों के पलायन आदि के खबरों की सूचनाएं ही आती है लेकिन एक समय ऐसा था कि यह जमशेदपुर शहर लोगों का जीवन की आशा का प्रतीक होता था लोगों को लगता था कि चलो Tata शहर वहां कुछ ना कुछ जीवन यापन का जुगाड़ तो हो ही जाएगा इस आशा में कितने ही लोग दूरदराज के क्षेत्रों से इस शहर में खींचे चले आते थे जमश...
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गुरुवार, 9 फ़रवरी 2017

राजनीति मे किसी व्यतित्व का फेस वैल्यू का इस्तेमाल कर आपना उल्लू सीधा उदाहरण है,आन्ना हजारे और उनका आंदोलन, महत्वकांक्षी और अवसर वादीयो का समूह ने सिदांत और नैतिकता के नाम पर आन्ना.हजारे का फेस वैल्यू का उपयोग कर कोई मुख्य मंत्री, कोई केंद्रीय मंत्री कोई राज्यपाल और कितने मंत्री बन गये। ये अवसरवादी समूह ने आन्ना हजारे को एक स्प्रिंग बोडँ के तरस इस्तेमाल किया और अपना स्वार्थ का हित साधे और निकल लिए। राजनिति मे निष्ठा और सिधांत का कोई जगह नही होती है अगर कुछ होता.है तो निर्मम अवसरवादिता लोगो को सीढ़ी के तरह उपयोग करो और भूल जाओ। Image may contain: 1 person Image may contain: 1 person, smiling, glasses and close-up Image may contain: 1 person, close-up Image may contain: 1 person, smiling

राजनीति मे किसी व्यतित्व का फेस वैल्यू का इस्तेमाल कर आपना उल्लू सीधा उदाहरण है,आन्ना हजारे और उनका आंदोलन, महत्वकांक्षी और अवसर वादीयो का समूह ने सिदांत और नैतिकता के नाम पर आन्ना.हजारे का फेस वैल्यू का उपयोग कर कोई मुख्य मंत्री, कोई केंद्रीय मंत्री कोई राज्यपाल और कितने मंत्री बन गये। ये अवसरवादी समूह ने आन्ना हजारे को एक स्प्रिंग बोडँ के तरस इस्तेमाल किया और अपना स्वार्थ का हित साधे और निकल लिए। राजनिति मे निष्ठा और सिधांत का कोई जगह नही होती है अगर कुछ होता.है तो निर्मम अवसरवादिता लोगो को सीढ़ी के तरह उपयोग करो और भूल जाओ।

तानाशाही राजनीतिक हो, लोकतांत्रिक ,हो या व्यतिगत उसका अंत बहुत ही र्ददनाक और भयानक होता है।इतिहास इस बात का गवाह है कि,राजनीति मे लगता था कि जिसका सितारा कभी नहीं डूबेगा,उसका अंत ऐसा हुआ कि खानदान मे कोई पानी देने वाला भी नहीं मिला। राजनीति में समय बलवान होता है ,व्यति नही,कभी जिनके साथ एक फोटो खिचाने भर से लोगो की जंदगी सवँर जाती थी, समय बदलते ही वे गुमनामी में ऐसे गये कि आज उनका नाम लेवा भी नही है। तानाशाही राजनीतिक हो या लोकतंत्रिक,या, घरेलू अंत तो भयानक रूप में ही होता है। तानाशाही करते समय तानाशाहो को यह अभाष ही नही होता है कि वे जो आज दुसरो के साथ गलत तरीके से व्यहार कर रहे है कल यही व्यहार उनके साथ भी हो सकता है। राजनीति में केवल अवसर बलवान होता है इंसान नही। यही पर तानाशाह गलती कर जाते हैं Image may contain: 7 people, text Image may contain: 1 person Image may contain: one or more people and food Image may contain: 6 people, text

तानाशाही राजनीतिक हो, लोकतांत्रिक ,हो या व्यतिगत उसका अंत बहुत ही र्ददनाक और भयानक होता है।इतिहास इस बात का गवाह है कि,राजनीति मे लगता था कि जिसका सितारा कभी नहीं डूबेगा,उसका अंत ऐसा हुआ कि खानदान मे कोई पानी देने वाला भी नहीं मिला। राजनीति में समय बलवान होता है ,व्यति नही,कभी जिनके साथ एक फोटो खिचाने भर से लोगो की जंदगी सवँर जाती थी, समय बदलते ही वे गुमनामी में ऐसे गये कि आज उनका नाम लेवा भी नही है। तानाशाही राजनीतिक हो या लोकतंत्रिक,या, घरेलू अंत तो भयानक रूप में ही होता है। तानाशाही करते समय तानाशाहो को यह अभाष ही नही होता है कि वे जो आज दुसरो के साथ गलत तरीके से व्यहार कर रहे है कल यही व्यहार उनके साथ भी हो सकता है। राजनीति में केवल अवसर बलवान होता है इंसान नही। यही पर तानाशाह गलती कर जाते हैं

सोमवार, 10 अक्टूबर 2016

भारतीय राजनीति के नव सामंतवाद के प्रतीक है ये नेता पुत्र, इनके नजर मे कानून, र्मयादा,,, लोक लाज, डर आदि का.कोई महत्व नहीं होता हैं। नीतीश कटारा हत्या कांड मे विकास यादव, जेसिका लाल हत्या कांड मे मनु शर्मा, या आदित्य सचदेवा हत्या कांड मे राकी यादव इन सब हत्याकांड मे सत्ता के मद मे अंधे नेताओं के पुत्रों की कारसतानी है। इनके अभिभावक सत्ता. प्राप्त कर जो कुर्कम करते हैं, उसका फल भोगते है उनके वारिस। राजनीति मे भ्रष्टाचार के परिणाम. है इस प्रकार का हत्या कांड, उन्हें पता है पैसा औऱ पावर से सब मैनेज होता है शार्दूल के कलम से's photo. शार्दूल के कलम से's photo. शार्दूल के कलम से's photo. शार्दूल के कलम से's photo.

भारतीय राजनीति के नव सामंतवाद के प्रतीक है ये नेता पुत्र, इनके नजर मे कानून, र्मयादा,,, लोक लाज, डर आदि का.कोई महत्व नहीं होता हैं। नीतीश कटारा हत्या कांड मे विकास यादव, जेसिका लाल हत्या कांड मे मनु शर्मा, या आदित्य सचदेवा हत्या कांड मे राकी यादव इन सब हत्याकांड मे सत्ता के मद मे अंधे नेताओं के पुत्रों की कारसतानी है। इनके अभिभावक सत्ता. प्राप्त कर जो कुर्कम करते हैं, उसका फल भोगते है उनके वारिस। राजनीति मे भ्रष्टाचार के परिणाम. है इस प्रकार का हत्या कांड, उन्हें पता है पैसा औऱ पावर से सब मैनेज होता है