लघु कथा
निरपराध
नंदू को बहुत प्रयास करने के बाद भी कोई रोजगार नहीं मिला,तो वह एक निजी बस में कंडक्टर का काम करने लगा । वह इस काम को बहुत ईमानदारी से करता था। बस में सबेरे के समय बहुत भीड़ होती थी कयोकि इस वक्त पढने जाने वाले विद्धाथियो औऱ काम पर जाने वाले लोग अधिक होते थे।आज नंदू बङी शीघ्र ता से सबकी टिकट काट रहा था,उसने सामने खडे रोबदार आदमी से कहाँ ॥ साहब टिकट॥ ,तो वह आदमी ने लग बग गुराते हुए कहा सटाफ हूँ ,तब नंदू ने बडी शालीनता से कहा ! साहब मै समझा नहीं कैसा सटाफ आप किस बस में काम करते है ।यह बात सुनते ही वह आदमी क्रोध से आग बबूला हो नंदू को गालियां देने लगा और कहा!साले मै तुम को बस में काम करने वाला लगता हूँ, मैं पुलिस सटाफ हूँ।तब इस विवाद को शांत कराते हुए खलासी हरि ने कहा साहब नया आदमी है ।इसे सिसटम के बारे कुछ नहीं मालुम है।इसने आप को पहचानने में गलती करदी है ।लेकिन आपने को पुलिस सटाफ बताने वाले आदमी ने बस रोकवा कर नंदू को पीटना शुरू कर दिया ।नंदू हतप्रभ था,उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की उसने गलती कया किया । लोगो ने बीच बचाव कर नंदू को उस पुलिसकम्री के हाथ से छुङया । नंदू को पीटने के बाद पुलीस कम्री विजेता की तरह सीना फुलाए गालियां बकते हुए चला गया। नंदू के नाक से खुन बह रहा था,उसे यह समझ मे नहीं आ रहा था कि उसकी आखिर गलती कयाथी? उसने बस किराया ही तो मांगआ था। उसे सिस्टम अब समझ में आ गया था।
निरपराध
नंदू को बहुत प्रयास करने के बाद भी कोई रोजगार नहीं मिला,तो वह एक निजी बस में कंडक्टर का काम करने लगा । वह इस काम को बहुत ईमानदारी से करता था। बस में सबेरे के समय बहुत भीड़ होती थी कयोकि इस वक्त पढने जाने वाले विद्धाथियो औऱ काम पर जाने वाले लोग अधिक होते थे।आज नंदू बङी शीघ्र ता से सबकी टिकट काट रहा था,उसने सामने खडे रोबदार आदमी से कहाँ ॥ साहब टिकट॥ ,तो वह आदमी ने लग बग गुराते हुए कहा सटाफ हूँ ,तब नंदू ने बडी शालीनता से कहा ! साहब मै समझा नहीं कैसा सटाफ आप किस बस में काम करते है ।यह बात सुनते ही वह आदमी क्रोध से आग बबूला हो नंदू को गालियां देने लगा और कहा!साले मै तुम को बस में काम करने वाला लगता हूँ, मैं पुलिस सटाफ हूँ।तब इस विवाद को शांत कराते हुए खलासी हरि ने कहा साहब नया आदमी है ।इसे सिसटम के बारे कुछ नहीं मालुम है।इसने आप को पहचानने में गलती करदी है ।लेकिन आपने को पुलिस सटाफ बताने वाले आदमी ने बस रोकवा कर नंदू को पीटना शुरू कर दिया ।नंदू हतप्रभ था,उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की उसने गलती कया किया । लोगो ने बीच बचाव कर नंदू को उस पुलिसकम्री के हाथ से छुङया । नंदू को पीटने के बाद पुलीस कम्री विजेता की तरह सीना फुलाए गालियां बकते हुए चला गया। नंदू के नाक से खुन बह रहा था,उसे यह समझ मे नहीं आ रहा था कि उसकी आखिर गलती कयाथी? उसने बस किराया ही तो मांगआ था। उसे सिस्टम अब समझ में आ गया था।
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