यह उस समय की बची हुई वे निशानीयाँ है, जब किसी भी राजनीतिक दलों से जुडने वाले लोगों का नर्सरी हुआ करता था ,ये दीवारो पर चुनाव प्रचार लेखन।उस समय कोई भी राजनीतिक कार्यक्रता पहले दीवार लेखन औऱ पोस्टर चिपकाने से ही राजनीतिक जीवन का शुरूआत करते थे। अब तो राजनीति मे गणेश परिक्रमा से भी अधिक रिफाईन फेस बुकीया परिक्रमा का दौर आ गया है। यह फोटो उस दौर की बची हुई निशानी याँ है, जब राजनीतिक दलों मे जमीनी कार्यक्रताओ को महत्व औऱ समम्मान मिलता था, जिस पर अब फेस बुकीया गणेश प्ररिक्रमीयो ने कब्जा जमा लिया है।
रविवार, 1 मई 2016
यह उस समय की बची हुई वे निशानीयाँ है, जब किसी भी राजनीतिक दलों से जुडने वाले लोगों का नर्सरी हुआ करता था ,ये दीवारो पर चुनाव प्रचार लेखन।उस समय कोई भी राजनीतिक कार्यक्रता पहले दीवार लेखन औऱ पोस्टर चिपकाने से ही राजनीतिक जीवन का शुरूआत करते थे। अब तो राजनीति मे गणेश परिक्रमा से भी अधिक रिफाईन फेस बुकीया परिक्रमा का दौर आ गया है। यह फोटो उस दौर की बची हुई निशानी याँ है, जब राजनीतिक दलों मे जमीनी कार्यक्रताओ को महत्व औऱ समम्मान मिलता था, जिस पर अब फेस बुकीया गणेश प्ररिक्रमीयो ने कब्जा जमा लिया है। शार्दूल के कलम से's photo. शार्दूल के कलम से's photo. शार्दूल के कलम से's photo. शार्दूल के कलम से's photo.
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