सुना पड़ा मंदिर

सड़क के किनारे स्थित पीपल के बृक्ष में लोग शानिवार को जल अर्पित करने या पीपल बृक्ष से जुड़ा कोई पूजा हो तो वे पूजा करने जाते थे ? एक ऎसे से ही एक अनजान भक्त ने एक दिन एक बड़ा सा काला चिकना पत्थर पीपल के बृक्ष के नीचे रख दिया। जब लोग पीपल बृक्ष की पूजा करने जाते तो साथ साथ उस काले पत्थर की पूजा करने लगे और सिंदूर या प्रसाद चढाने लगे। फिर एक दिन पूजा करने वाले व्यक्तियों ने पीपल बृक्ष के निचे गोलदार चबूतरा बना उस चिकने काले पत्थर को स्थापित कर दिया। फिर कुछ दिनों बाद उस स्थान पर मंदिर निर्माण की आवश्यकता का अनुभव हुआ। चंदा एकत्रित हुए औरमदिर का निर्माण का शुभारम्भ हो गया। मंदिर बन जाने के बाद पुजारी के रहने के लिए निवास स्थान की आवश्यकता पड़ी। इसलिए मंदिर के निकट एक घर बना। मंदिर में अब खूब पूजा - पाठ और नियमित रूप से कीर्तन भजन होने लगा। धीरे धीरे मंदिर के अगल बगल पूजा सामग्री बेचने वालो की दुकान लगनी सुरु हो गयी। अब वहां बाजार लगने लगा। बाजार में लगने वाले दुकान अब पक्के बन गए है। लेकिन मंदिर सुना पड़ा है , अब वहां कोई पूजा पाठ नही करने जाता है। वहां नशेड़ियों और जुआरियो का जमघट लगता है। अब भूले भटके ही कोई उस मंदिर में पूजा करने जाता है।मघट लगता है। अब भूले भटके ही कोई उस मंदिर में पूजा करने जाता है।
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