ये तीन बंदर वास्तव मे भारतीय राजनीति के सिस्टम के प्रतिक है। न सच बोलो, न सच देखो, न सच सुनो, अगर इस सिस्टम से हट कर कोई सकरातमक कार्य किया तो लोग अपको विद्रोही, अतिवादी, उग्रवादी आदि कहने लगेंगे। पुरा प्रशासन, कानून ,पुलिस व्यशथा, राजनीतिक दलों की अंतरिक सिस्टम सबका यही फ्रमुला है।चाहे शासन मे कोई भी दल या आदमी यही सिस्टम से काम होगा न सच बोलो, न सच सुनो, न सच देखो।बाकि सिद्धांत, उपदेश, उदेशय, मुलयो की बातें बेकार है, इसी सिस्टम पर देश औऱ समाज चलता आया है आगे भी ऐसे ही चलेगा । इस तंत्र या सिस्टम से हट कर अलग काम करनेवाले लोगों को कोई नहीं पसंद करता है न सहयोग करता है, बस उसका फोटो पर माला चढाता है।
बुधवार, 27 जनवरी 2016
ये तीन बंदर वास्तव मे भारतीय राजनीति के सिस्टम के प्रतिक है। न सच बोलो, न सच देखो, न सच सुनो, अगर इस सिस्टम से हट कर कोई सकरातमक कार्य किया तो लोग अपको विद्रोही, अतिवादी, उग्रवादी आदि कहने लगेंगे। पुरा प्रशासन, कानून ,पुलिस व्यशथा, राजनीतिक दलों की अंतरिक सिस्टम सबका यही फ्रमुला है।चाहे शासन मे कोई भी दल या आदमी यही सिस्टम से काम होगा न सच बोलो, न सच सुनो, न सच देखो।बाकि सिद्धांत, उपदेश, उदेशय, मुलयो की बातें बेकार है, इसी सिस्टम पर देश औऱ समाज चलता आया है आगे भी ऐसे ही चलेगा । इस तंत्र या सिस्टम से हट कर अलग काम करनेवाले लोगों को कोई नहीं पसंद करता है न सहयोग करता है, बस उसका फोटो पर माला चढाता है। शार्दूल के कलम से's photo.
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