बुधवार, 27 जनवरी 2016

कानून उस मकड़े की जाल की तरह है जिस में छोटे कीड़े मकोड़े {गरीब ,कमजोर } तो फंस जाते है , लकिन बड़े कीड़े मकोड़े (धनवान बहुबली ) उसे तोड़ कर निकल जाते है . भारत में आज तक किसी करोड़पति को फांसी नहीं लगी है | न्यायालय में सब बिकने को बैठे है , बस उसे सही दाम दे कर ख़रीदने वाला चहिये ,कानून सब के लिए बराबर है बेकार की बात है , कानून हमेशा पैसेवालों का रहा है और रहेगा शार्दूल के कलम से's photo.

कानून उस मकड़े की जाल की तरह है जिस में छोटे कीड़े मकोड़े {गरीब ,कमजोर } तो फंस जाते है , लकिन बड़े कीड़े मकोड़े (धनवान बहुबली ) उसे तोड़ कर निकल जाते है . भारत में आज तक किसी करोड़पति को फांसी नहीं लगी है | न्यायालय में सब बिकने को बैठे है , बस उसे सही दाम दे कर ख़रीदने वाला चहिये ,कानून सब के लिए बराबर है बेकार की बात है , कानून हमेशा पैसेवालों का रहा है और रहेगा

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