रविवार, 7 फ़रवरी 2016

चेहरा पहचानो और इनाम जीतो का विज्ञापन देकर भोले भाले लोगो के साथ ठगी और जालसाजी का खेल वर्षो से चल रहा है. इस ठगी के रैकेट में भोले भाले लोग फँस कर अपनी गाढ़ी कमाई लूटा बैठते है. इस प्रकार के ठगी का विज्ञापन देकर चलाने वाले माफिया दूर -दराज के शहरों और कस्बो के समाचारपत्रों , केबल टीवी और छेत्रीय चेंनलो में चेहरा पहचानो और ईनाम जीतो का विज्ञापन दिया जाता है, जिसमे फ़िल्मी सितारे या प्रसिद्ध खिलाड़ियों का चेहरा दिखाया जाता है और विजेता प्रतिभागी को ईनाम स्वरुप टाटा सफारी, सूमो और टाटा का कार देने का लालच दिया जाता है. इन फर्जी विज्ञापनों में सेलेब्रिटियों का चेहरा ऐसे दिखाया जाता है की ३ साल का टीवी देखने वाला बच्चा भी आसानी से इस चेहरा को पहचान जाये उसके बाद चेहरा को पहचान जाये. उसके बाद चेहरा पहचानने वाले प्रतिभागी को कहा जाता है कि आपने यह प्रतियोगिता जीत ली है. और आपको इनाम में टाटा सफारी मिला है. लेकिन जीते हुए इनाम को लेने के लिए आपको कागजी करवाई के लिए रुपये देने होंगे. टाटा सफारी पाने के लालच में लोग इन जालसाज, ठग विज्ञापनदाता के दिये हुए बैंक एकाउंट में रूपया जमा कराते है, उसके बाद जब व्यक्ति गाड़ी के लिए विज्ञापनदाता से संपर्क करते है। तो वे प्रतियोगी विजेता को टाटा मोटर्स के गेट पर आने को कहते है और फर्जी किसी भी व्यक्ति का नाम टाटा मोटर्स का पदाधिकारी बना नाम दे देते है. टाटा मोटर्स गेट पर सुदूर शहरों और कस्बो से पहुँचकर वह उस अधिकारी से संपर्क करना चाहता है तो पता चलता है की ऐसे नाम का कोई पदाधिकारी है ही नही और न ही इस कंपनी ने ऐसे कोई स्कीम चलाई है. वे पूर्व में और व्यक्ति की भांति ठगी का शिकार हो गये है. उसके बाद वे विज्ञापनदाता के मोबाइल पर संपर्क करना चाहते है तो जालसाज विज्ञापनदाता अपना मोबाइल स्वीच ऑफ़ कर लेता है और पीड़िता व्यक्ति कुछ नही कर पता. क्यूंकि टाटा मोटर्स कंपनी के पदाधिकारी कहते है कि इस प्रकार का घटना से कंपनी का कोई लेना - देना नही है और पुलिस प्रसाशन कहता है कि आपने जिस जगह बैंक में रुपया जमा कराये है, वही जाकर केस दर्ज कराइए क्यूंकि पी. ओ. वही है. विगत कई वर्षो से इस प्रकार का चेहरा पहचानो और ईनाम जीतो प्रतियोगिता का विज्ञापन देकर ठगी और जालसाजी का सिलसिला चल रहा है लेकिन इतने बड़े राष्ट्रीय स्तर पर लगातार हो रहे इस अपराध के विरुद्ध कोई गंभीर प्रयास न तो पुलिस प्रशासन न ही टाटा कंपनी ही संज्ञान लेती है. क्यूंकि पीड़ित व्यक्ति दूसरे अत्यंत दूर-दराज के शहर व कस्बों के व्यक्ति होते है. जैसे पंजाब, असम, मेघालय , राजस्थान , मध्यप्रदेश महाराष्ट्र , गुजरात आदि सुदूर प्रदेश के यहाँ जमशेदपुर शहर में पीड़ित व्यक्ति का न तो कोई मददगार होता है न ठहरने का कोई ठिकाना, अतः वे कहीं कोई अनेक फरियाद का सुनवाई होती है आखिर में वे रोते सिर पिठते अपना घर खली हाथ वापस लौट जाते है. जालसाज विज्ञापनदाता का पत्र-पत्रिकाओं केवल टी. वी. और लोकल छेत्रीय चैनलों के विरुद्ध न कोई जाँच होती है न कोई करवाई होती है, क्यूंकि ठगी और शिकायत स्थल अलग - अलग दूसरे राज्य होते है. उन बैंक एकाउंट की भी जाँच नही होती है और उन मोबाइल नंबरों की ही जाँच होती है जिनसे आरोपी अपराधी फोन कर लोगो को ठगते और लूटते है. जालसाज माफिया जैसे ही पीड़ित व्यक्ति द्वारा बैंक एकाउंट में रुपया जमा किया जाता है वे तुरंत रुपया एकाउंट से निकालकर अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर देते है. उसके बाद पीड़ित व्यक्ति हाथ मलता रह जाता है. पिछले वर्ष इस प्रकार के अपराध पर बहुत हंगामा होने के बाद टाटा मोटर्स कंपनी और जमशेदपुर जिला पुलिस प्रसाशन ने मिलकर संयुक्त रूप से इन ठग और जालसाजों के विरुद्ध शहर में जग जागरण जागरूकता अभियान चलाया था, जो केवल सांकेतिक जागरूकता अभियान बन कर रह गया, क्यूंकि यह जागरूकता अभियान जमशेदपुर शहर में चलाया गया, लेकिन इस प्रकार साईबर ठगी और जालसाजी का अपराध स्थल दूर दराज के दूसरे राज्यों के शहरों में है जहाँ इस जान जागरूकता की जानकारी या प्रभाव नही पड़ा. हर दिन विभिन्न शहरों से दो - चार व्यक्ति प्रतिदिन टाटा मोटर्स कंपनी के मैं गेट पर सफारी गाड़ी लेने के लिए पहुँचते है और उसके बाद ठग जाने की जानकारी मिलने के बाद थाना जाते है. जहाँ इन पीडितो का शिकायत भी थाना में दर्ज नही होता है न कही कोई सुनवाई ही नही होती है. आमलोग समझ नहर पाते कि इतने बड़े ठगी का रैकेट संचालित हो रहा है और इतने शिकायतों के बाद भी इनके विरुद्ध करवाई क्यों नही होती है. इस अपराधिक साइबर समस्या को पुलिस प्रशासन टाटा मोटर्स कंपनी पर आउट टाटा मोटर्स कंपनी पुलिस प्रशासन एक दूसरे को थोपते रहते है. क्यूंकि जिम्मेवारी या संज्ञान लेने को तैयार नही है, आज सोशल मीडिया, इंटरनेट के दौर में पुलिस प्रशासन और टाटा मोटर्स कंपनी को चाहिए की वे संयुक्त रूप से लगातार आमलोगों के बीच सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इन ठगी और जालसाजी अपराधिक रैकटो के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाये. क्यूंकि पीड़ित व्यक्ति अत्यंत निर्धन या माध्यम वर्ग के होते है. जिनका आखों में यह सपना होता है कि हमारे पास भी एक चारपहिये वाहन हो लोगों को इन सपनो का फायदा उठा लोगों को ये जालसाज लूटते है. इन अपराधिक घटनाओं से जमशेदपुर शहर और संवंधित कंपनी का नाम बदनाम होता है और प्रतिष्ठा घूमिल होती है. क्यूंकि भुक्तभोगी जब ठगा जाता है और उसे कहीं न्याय नही मिलता है तो उसे लगता है की ये सब आपस के मिलीभगत से होता है , क्यूंकि न तो भूतभोगियो को वापस उसके दिए हुए रुपये मिलते है न ही इन ठग विज्ञापनदाताओं के विरुद्ध कोई कानूनी करवाई ही होती है.

चेहरा पहचानो और इनाम जीतो का विज्ञापन देकर भोले भाले लोगो के साथ ठगी और जालसाजी का खेल  वर्षो से चल रहा है. इस ठगी के रैकेट में भोले भाले लोग फँस कर अपनी गाढ़ी कमाई लूटा बैठते है. इस प्रकार के ठगी का विज्ञापन देकर चलाने वाले माफिया दूर -दराज के शहरों और कस्बो के समाचारपत्रों , केबल टीवी और छेत्रीय चेंनलो में चेहरा पहचानो और ईनाम जीतो का विज्ञापन दिया जाता है, जिसमे फ़िल्मी सितारे या प्रसिद्ध खिलाड़ियों का चेहरा दिखाया जाता है और विजेता प्रतिभागी को ईनाम स्वरुप टाटा सफारी, सूमो और टाटा का कार देने का लालच दिया जाता है. इन फर्जी विज्ञापनों में सेलेब्रिटियों का चेहरा ऐसे दिखाया जाता है की ३ साल का टीवी  देखने वाला बच्चा भी आसानी से इस चेहरा को  पहचान जाये उसके   बाद चेहरा को पहचान जाये. उसके बाद चेहरा पहचानने वाले प्रतिभागी को कहा जाता है कि आपने यह प्रतियोगिता जीत ली है. और आपको इनाम में टाटा सफारी मिला है. लेकिन जीते हुए इनाम को लेने के लिए आपको कागजी करवाई के लिए रुपये देने होंगे. टाटा  सफारी पाने के लालच में लोग इन जालसाज, ठग विज्ञापनदाता के दिये हुए बैंक एकाउंट में रूपया जमा कराते है, उसके बाद जब व्यक्ति गाड़ी के लिए विज्ञापनदाता से संपर्क करते है।  तो वे प्रतियोगी विजेता को टाटा मोटर्स के गेट पर आने को कहते है और फर्जी किसी भी व्यक्ति का नाम टाटा मोटर्स का पदाधिकारी बना नाम दे देते है. टाटा मोटर्स गेट पर सुदूर शहरों और  कस्बो से पहुँचकर वह उस अधिकारी से संपर्क करना चाहता है तो पता चलता है की ऐसे नाम का कोई पदाधिकारी है ही नही और न ही इस कंपनी ने ऐसे कोई स्कीम चलाई है. वे पूर्व में और व्यक्ति की भांति ठगी का शिकार हो गये है. उसके बाद वे विज्ञापनदाता के मोबाइल पर संपर्क करना चाहते है तो जालसाज विज्ञापनदाता अपना मोबाइल स्वीच ऑफ़ कर लेता है और पीड़िता व्यक्ति कुछ नही कर पता. क्यूंकि टाटा मोटर्स कंपनी के पदाधिकारी कहते है कि इस प्रकार का घटना से कंपनी का कोई लेना - देना नही है और पुलिस प्रसाशन कहता है कि आपने जिस जगह बैंक में रुपया जमा कराये है, वही जाकर केस दर्ज कराइए क्यूंकि पी. ओ. वही है. विगत कई वर्षो से इस प्रकार का चेहरा पहचानो और ईनाम जीतो प्रतियोगिता  का विज्ञापन देकर ठगी और जालसाजी का सिलसिला चल रहा है लेकिन इतने बड़े राष्ट्रीय स्तर पर लगातार हो रहे इस अपराध के विरुद्ध कोई गंभीर प्रयास न तो पुलिस प्रशासन न ही टाटा कंपनी ही संज्ञान लेती है. क्यूंकि पीड़ित व्यक्ति  दूसरे अत्यंत दूर-दराज के शहर व कस्बों के व्यक्ति होते है. जैसे  पंजाब, असम, मेघालय , राजस्थान , मध्यप्रदेश महाराष्ट्र , गुजरात आदि सुदूर प्रदेश के यहाँ जमशेदपुर शहर में पीड़ित व्यक्ति का न तो कोई मददगार होता है न ठहरने का कोई ठिकाना, अतः वे कहीं कोई अनेक फरियाद का सुनवाई होती है आखिर में वे रोते सिर पिठते अपना घर खली हाथ वापस लौट जाते है. जालसाज विज्ञापनदाता का पत्र-पत्रिकाओं केवल टी. वी. और लोकल छेत्रीय चैनलों के विरुद्ध न कोई जाँच होती है न कोई करवाई होती है, क्यूंकि ठगी और शिकायत स्थल अलग - अलग दूसरे राज्य होते है. उन बैंक एकाउंट की भी जाँच नही होती है और उन मोबाइल नंबरों की ही जाँच होती है जिनसे आरोपी अपराधी फोन कर लोगो  को ठगते और लूटते है. जालसाज माफिया जैसे ही पीड़ित व्यक्ति द्वारा बैंक एकाउंट में रुपया जमा किया जाता है वे तुरंत रुपया एकाउंट से निकालकर अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर देते है. उसके बाद पीड़ित व्यक्ति हाथ मलता रह जाता है. पिछले वर्ष इस प्रकार के अपराध पर बहुत हंगामा होने के बाद टाटा मोटर्स कंपनी और जमशेदपुर जिला पुलिस प्रसाशन ने मिलकर संयुक्त रूप से इन ठग और जालसाजों के विरुद्ध शहर में जग जागरण जागरूकता अभियान चलाया था, जो केवल सांकेतिक जागरूकता अभियान बन कर रह गया, क्यूंकि यह जागरूकता अभियान जमशेदपुर शहर  में चलाया गया, लेकिन इस प्रकार साईबर ठगी और जालसाजी का अपराध स्थल दूर दराज के दूसरे राज्यों के शहरों में है जहाँ इस जान जागरूकता की जानकारी या प्रभाव नही पड़ा. हर दिन विभिन्न  शहरों से दो - चार व्यक्ति प्रतिदिन टाटा मोटर्स कंपनी के मैं गेट पर सफारी गाड़ी लेने के लिए पहुँचते है  और उसके बाद ठग जाने की जानकारी मिलने के बाद थाना जाते है. जहाँ इन पीडितो का शिकायत भी थाना में दर्ज नही होता है न कही कोई सुनवाई ही नही होती है. आमलोग समझ नहर पाते कि इतने बड़े ठगी का रैकेट संचालित हो रहा है और इतने शिकायतों के बाद भी इनके विरुद्ध करवाई क्यों नही होती है. इस अपराधिक साइबर समस्या को पुलिस प्रशासन टाटा मोटर्स कंपनी पर आउट टाटा मोटर्स कंपनी पुलिस प्रशासन एक दूसरे को थोपते रहते है. क्यूंकि जिम्मेवारी या संज्ञान लेने को तैयार नही है, आज सोशल मीडिया, इंटरनेट के दौर में पुलिस प्रशासन और टाटा मोटर्स कंपनी को चाहिए की वे संयुक्त रूप से लगातार आमलोगों के बीच सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया  में इन ठगी और जालसाजी अपराधिक रैकटो के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाये. क्यूंकि पीड़ित व्यक्ति अत्यंत निर्धन या माध्यम वर्ग के होते है. जिनका आखों में यह सपना होता है कि हमारे पास भी एक चारपहिये वाहन हो लोगों को इन सपनो का फायदा उठा लोगों को ये जालसाज लूटते है. इन अपराधिक घटनाओं से जमशेदपुर शहर और संवंधित कंपनी का नाम बदनाम होता है और प्रतिष्ठा घूमिल होती है. क्यूंकि भुक्तभोगी जब ठगा जाता है और उसे कहीं न्याय नही मिलता है तो उसे लगता है की ये सब आपस के मिलीभगत से होता है , क्यूंकि न तो भूतभोगियो को वापस उसके दिए हुए रुपये मिलते है न ही इन ठग विज्ञापनदाताओं के विरुद्ध कोई कानूनी करवाई ही होती है.


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