आज पत्रकारिता के क्षेत्र मे भी पुलिस प्रशासन के क्षेत्र के तरह भ्रष्टाचार घुन लग गया है।सबसे दुःख द बात यह है कि प्रेस रिपोटर या प्रेस फोटोग्राफर का थाना का नेताओं का लाईजनर बन जाना।अब तो बहुत प्रेस रिपोर्टरो औऱ प्रेस फोटोग्राफरो को खुले आम थाने मे पैरवी औऱ दलाली करते देख जा सकते है। दलाली औऱ पैरवी जो काम पहले नेता या दलाल करते थे उनका जगह अब पत्रकारिता से जुड़े लोगों ने ले लिया है। मैंने थाना मे एक ठग का पैरवी करते दैनिक समाचार पत्र के संवदाता को देखा औऱ एक प्रेस फोटोग्राफर को अपने कैमरा का चिप निकल कर पुलिस देते देखा ,बाद मे उस चिप के फोटो को देख कर पुलिस ने आंदोलन मे शामिल लोगो पर केस किया। इस विषय पर बात करने पर आथिक समस्या का हवाला दे कर सही ठहरने की कोशिश किया जाता है।यह अपवित्र गठबंधन हमारे समाज को औऱ अंधेरे गंर्त मे ढकेल रहा है।
शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016
आज पत्रकारिता के क्षेत्र मे भी पुलिस प्रशासन के क्षेत्र के तरह भ्रष्टाचार घुन लग गया है।सबसे दुःख द बात यह है कि प्रेस रिपोटर या प्रेस फोटोग्राफर का थाना का नेताओं का लाईजनर बन जाना।अब तो बहुत प्रेस रिपोर्टरो औऱ प्रेस फोटोग्राफरो को खुले आम थाने मे पैरवी औऱ दलाली करते देख जा सकते है। दलाली औऱ पैरवी जो काम पहले नेता या दलाल करते थे उनका जगह अब पत्रकारिता से जुड़े लोगों ने ले लिया है। मैंने थाना मे एक ठग का पैरवी करते दैनिक समाचार पत्र के संवदाता को देखा औऱ एक प्रेस फोटोग्राफर को अपने कैमरा का चिप निकल कर पुलिस देते देखा ,बाद मे उस चिप के फोटो को देख कर पुलिस ने आंदोलन मे शामिल लोगो पर केस किया। इस विषय पर बात करने पर आथिक समस्या का हवाला दे कर सही ठहरने की कोशिश किया जाता है।यह अपवित्र गठबंधन हमारे समाज को औऱ अंधेरे गंर्त मे ढकेल रहा है। शार्दूल के कलम से's photo. शार्दूल के कलम से's photo.
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