गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016

जमशेदपुर में "पैकर्स एंड मूवर्स " की बिगड़ती सेहत ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़ा एक व्यवसाय है पैकर्स एंड मूवर्स। यह व्यवसाय जमशेदपुर में १९८८ से मुख्यतः आरम्भ हुआ जब मंदी के दौर में टिस्को और टेल्को कंपनी ने अपने कर्मचारियों की छटनी एययास और वीआरएस के जरिये शुरू की थी। जब दूर दराज के लोग अपने घर का सामान ले जाने के लिए ट्रांस्पोटरों का रुख किया तो उन्ही ट्रांसपोर्ट कम्पनियो ने पैकर्स एंड मूवर्स नाम से अलग कंपनी बनाई जो मुख्यत घर के सामान और गाड़ियों को सुरछित रूप से एक जगह सर दूसरी जगह ले जाने में सहायता करने लगी। यह व्यवसाय जमशेदपुरme १२ सर १५ वर्षो तक चलने के बाद आज विभिन्न कारणों से अपने वजूद को कायम रखने के लिए संघर्ष करती नज़र आ रही हैं, इस व्यवसाय में पहले मूलतः जमशेदपुर शहर के ही ५ से ७ ट्रांसपोर्ट कम्पनियाँ थी। धीरे-धीरे इसे बहार की बड़ी बड़ी कंपनियां और छोटे-छोटे ट्रांसपोर्टर भी जुड़ने लगे ताकि वे भी ज्यादा से ज्यादा कम सके. इस प्रकार पैकर्स एंड मूवर्स व्यवसाय में भेड़िया धसान से इसका पूरा परिदृश्य ही बदल गया। पहले यह सेवा - व्यवसाय था जिसे लोगों ने अब केवल पैसे बनाने का माध्यम बना लिया इससे इस व्यवसाय की गुणवत्ता में भी भारी कमी देखने को मिली हैं और इसकी बदनामी का कारण भी बनी है। अब हर बड़ी छोटी गाड़ी का मालिक भी पैकर्स एंड मूवर्स का बोर्ड अपनी गाड़ी पर लगा कर घूमता है। स्थिति बद से बदतर हो चली है और स्थिति यहां तक पहुंच चुकी है की हर महीने २ से ३ नयी कंपनियां इस छेत्र में आती हैं और कमोवेश इतनी ही बंद भी हो जाती है इससे स्थापित कंपनियों के कारोबार पर भी आसार पड़ता हैं। एक समय था जब जमशेदपुर ही नही बल्कि आस पास के छेत्रो में भी पैकर्स एंड मूवर्स के विज्ञापन भरे पड़े मिलते थे। विज्ञापनों के जरिये कंपनियों के बीच काफी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती थी लेकिन अब यह स्थिति नही रही। नयी छोटी छोटी और भगोड़ी कंपनियों के कारोबार पर प्रतिकूल आसार पड़ा है। अब वो कंपनियां पहले की तरह विज्ञापन नही कर पति हैं। आर्थिक मंडी और गला काट प्रतिस्पर्धा के कारण पैकर्स एंड मूवर्स कंपनियां जमशेदपुर में अपना वजूद खोती जा रही हैं। अब ऐसा लगता है कि इस छेत्र में बड़ी कंपनियां ही रह जाएंगी और स्थानीय मजदुर और ट्रांसपोर्ट कंपनियां बेकार हो जाएंगी। आज इस छेत्र में गुणवत्ता नाम की कोई चीज नही रह गई है। जमशेदपुर में कई अच्छी स्थापित कंपनियां इस कारण बंदी के कगार पर पहुंच चुकी हैं क्यूंकि वह गुणवत्ता से समझौता नही कर पति हैं। इस व्यवसाय को असली नुकसान उन कंपनियों ने पहुँचाया है जो केवल नाम के लिए पैकर्स एंड मूवर्स का कारोबार साल दो साल के लिए शुरू करते हैं और ग्राहकों के साथ झूठे वादे कर उन्हें धोखा देते हैं। लोगों को चुना लगाने के बाद वे अपना नाम बदल लेते हैं या अपना धंधा बंद कर देते हैं। आज यह स्थिति हैं की कोई भी व्यक्ति नेट पर अपनी विज्ञापन देकर कंपनी शुरू करता है और धंधा चलता है। न तो कोई ऑफिस होता है और न ही कोई ठिकाना , ऐसे लोग एक बैग से ही अपना कारोबार चलाते है उसी बैग में उनका कोटेशन होता है और उसी बैग में चालान और बिल वह केवल फोन से ही अपना कारोबार चलाते हैं। लोगों को चुना लगाने के बाद अपना मोबाइल बंद कर देते हैं और फिर से नए नाम से नया कारोबार शुरू कर देते हैं। ऐसे कई शिकायते पुलिस को भी मिलती हैं लेकिन फिर भी यह लोग पकडे नही जाते। एक समय था जस इस व्यवसाय की बड़ी ही प्रतिष्ठा थी लेकिन ऐसे कुछ कारोबारियों ने उस प्रतिष्ठा को घुमिल करने में कोई कसार नही छोड़ी। कुछ पैकर्स एंड मूवर्स कम्पनियो तो इस कारोबार की आड़ में गैर कानूनी धंधा भी करते हैं हाल ही में एक ऐसी कंपनी पकड़ी गयी जो इस कारोबार के नाम पर चोरी का सामान ढोती थी।ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में घर का सामान ढोने में करों में छूट का प्रावधान हैं जिसका फ़ायदा उठाने के लिए कुछ कंपनियां इस छेत्र में उतरती हैं और इस कारोबार की आड़ लेकर व्यावसायिक सामानों की ढुलाई करते हैं और करों की चोरी करते हैं। कुछ कुछ लोग तो शव ढोने वाली गाड़ियों का भी इस्तेमाल पैकर्स एंड मूवर्स के लिए करते हैं , सेवा छेत्र की इन कंपनियों का महत्व तब बहुत बढ़ जाता है जब हमें इनकी जरुरत होती है। उस वक़्त हमें इनके भरोसे की कीमत का एहसास होता है। इसलिए वक़्त आ गया है की ग्राहकों को भी सतर्क रहना चाहिए जिससे उन्हें धोखा न हो और वे इनकी सेवा और भरोसे का इस्तेमाल कर सकें। हर कारोबार की तरह इसमें भी सस्ते और लुवावन वादे करने वाली कंपनियों से बचने की जरुरत है ताकि भविष्य में ठगे जाने की खतरे को कम किया जा सके, आजकल सभी अच्छी कंपनियों का पूरा कच्चा चिटठा इंटरनेट पर मौजूद है।

जमशेदपुर में "पैकर्स एंड मूवर्स " की बिगड़ती सेहत

ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़ा एक व्यवसाय है पैकर्स एंड मूवर्स।  यह व्यवसाय जमशेदपुर में १९८८  से मुख्यतः आरम्भ हुआ जब मंदी के दौर में टिस्को और टेल्को कंपनी ने अपने कर्मचारियों की छटनी एययास  और वीआरएस के जरिये शुरू की थी।  जब दूर दराज के लोग अपने घर का सामान ले जाने के लिए ट्रांस्पोटरों का रुख किया तो उन्ही ट्रांसपोर्ट कम्पनियो ने पैकर्स एंड मूवर्स नाम से अलग कंपनी बनाई जो मुख्यत घर के सामान और गाड़ियों को सुरछित रूप से एक जगह सर दूसरी जगह ले जाने में सहायता करने लगी।  यह व्यवसाय जमशेदपुरme १२ सर १५ वर्षो तक चलने के बाद आज विभिन्न कारणों से अपने वजूद को कायम रखने के लिए संघर्ष करती नज़र आ रही हैं, इस व्यवसाय में पहले मूलतः जमशेदपुर शहर के ही ५ से ७ ट्रांसपोर्ट कम्पनियाँ थी।  धीरे-धीरे इसे बहार की बड़ी बड़ी कंपनियां और छोटे-छोटे ट्रांसपोर्टर भी जुड़ने लगे ताकि वे भी ज्यादा से ज्यादा कम सके. इस प्रकार पैकर्स एंड मूवर्स व्यवसाय में भेड़िया धसान से इसका पूरा परिदृश्य ही बदल गया। पहले यह सेवा - व्यवसाय था जिसे लोगों ने अब केवल पैसे बनाने का माध्यम बना लिया इससे इस व्यवसाय की गुणवत्ता में भी भारी कमी देखने को मिली हैं और इसकी बदनामी का कारण भी बनी है।  अब हर बड़ी छोटी गाड़ी का मालिक भी पैकर्स एंड मूवर्स का बोर्ड अपनी गाड़ी पर लगा कर घूमता है।  स्थिति बद से बदतर  हो चली  है और स्थिति  यहां तक पहुंच चुकी  है की हर महीने २ से ३ नयी कंपनियां इस छेत्र में आती हैं और कमोवेश इतनी ही बंद भी हो जाती है इससे स्थापित कंपनियों के कारोबार पर भी आसार पड़ता हैं।  एक समय था जब जमशेदपुर ही नही बल्कि आस पास के छेत्रो  में भी पैकर्स एंड मूवर्स के विज्ञापन भरे पड़े मिलते थे। विज्ञापनों के जरिये कंपनियों के बीच काफी प्रतिस्पर्धा  देखने को मिलती थी लेकिन अब यह स्थिति नही रही। नयी छोटी छोटी और भगोड़ी कंपनियों के कारोबार  पर प्रतिकूल आसार पड़ा है।  अब वो कंपनियां  पहले  की तरह विज्ञापन नही कर पति हैं। आर्थिक मंडी और गला काट प्रतिस्पर्धा के कारण पैकर्स एंड मूवर्स कंपनियां जमशेदपुर में अपना वजूद खोती जा रही हैं।  अब ऐसा लगता है कि इस छेत्र में बड़ी कंपनियां ही रह जाएंगी और स्थानीय मजदुर और ट्रांसपोर्ट कंपनियां बेकार हो जाएंगी। आज इस छेत्र में गुणवत्ता नाम की कोई चीज नही रह गई है। जमशेदपुर में कई अच्छी स्थापित कंपनियां इस कारण बंदी के कगार पर पहुंच चुकी हैं क्यूंकि वह गुणवत्ता से समझौता नही कर पति हैं। इस व्यवसाय को असली नुकसान उन कंपनियों ने पहुँचाया है जो केवल नाम के लिए पैकर्स एंड मूवर्स का कारोबार साल दो साल के लिए शुरू  करते हैं और ग्राहकों के साथ झूठे वादे कर उन्हें धोखा देते हैं।  लोगों को चुना लगाने के बाद वे अपना नाम बदल लेते हैं या अपना धंधा बंद कर देते हैं।  आज यह स्थिति हैं की कोई भी व्यक्ति नेट पर अपनी विज्ञापन देकर  कंपनी शुरू करता है और धंधा चलता है।  न तो कोई ऑफिस होता है और न ही कोई ठिकाना , ऐसे लोग एक बैग से ही अपना कारोबार चलाते है उसी बैग में उनका कोटेशन होता है और उसी बैग में चालान और बिल वह केवल फोन से ही अपना कारोबार चलाते हैं।  लोगों को चुना लगाने के बाद अपना मोबाइल बंद कर देते हैं और फिर से नए नाम से नया कारोबार शुरू कर देते हैं।  ऐसे कई शिकायते पुलिस को भी मिलती हैं लेकिन फिर भी यह लोग पकडे नही जाते।  एक समय था जस इस व्यवसाय की बड़ी ही प्रतिष्ठा थी लेकिन ऐसे कुछ कारोबारियों ने उस प्रतिष्ठा को घुमिल करने में कोई कसार नही छोड़ी।  कुछ पैकर्स एंड मूवर्स कम्पनियो तो इस कारोबार की आड़ में गैर कानूनी धंधा भी करते हैं हाल ही में एक ऐसी कंपनी पकड़ी गयी जो इस  कारोबार के नाम पर चोरी का सामान ढोती थी।ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में घर का सामान ढोने में करों में छूट का प्रावधान हैं जिसका फ़ायदा उठाने के लिए कुछ कंपनियां इस छेत्र में उतरती हैं और इस कारोबार की आड़ लेकर व्यावसायिक सामानों की ढुलाई करते हैं और करों की चोरी करते हैं।  कुछ कुछ लोग तो  शव ढोने वाली गाड़ियों का भी इस्तेमाल पैकर्स एंड मूवर्स के लिए करते हैं , सेवा छेत्र की इन कंपनियों का महत्व तब बहुत बढ़ जाता है जब  हमें  इनकी जरुरत होती है।  उस वक़्त हमें इनके भरोसे की कीमत का एहसास होता है।  इसलिए वक़्त आ गया है की ग्राहकों को भी सतर्क रहना चाहिए जिससे उन्हें धोखा न हो और वे इनकी सेवा और भरोसे का इस्तेमाल कर सकें। हर कारोबार की तरह इसमें भी सस्ते और लुवावन वादे करने वाली कंपनियों से बचने की जरुरत है ताकि भविष्य  में ठगे जाने की खतरे को कम किया जा सके, आजकल सभी अच्छी कंपनियों का पूरा कच्चा चिटठा इंटरनेट पर मौजूद है। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें