सोमवार, 10 अक्टूबर 2016

कानून औऱ प्रशासन मे सदैव हैसियत औऱ रुपया के हिसाब से ही न्याय होता रहा है आगे भी ऐसा ही होगा। गरीब व्यक्ति का हत्या भी आत्म हत्या बन जाता है औऱ अमीर व्यक्ति का आत्म हत्या भी हत्या मे बदल जाता है। मैंने आत्म हत्या के केस को हत्या के रूप बदलते औऱ परिवारो को बरबाद होते देखा है औऱ हत्या के पिडीत परिवारो को न्याय माँगते दर दर ठोकर खाते देखा है। गरीब व्यक्ति के लिए कोई राजनीतिक दल भी आवाज नहीं उठाता है ,हाँ उनका नाम अपने हिसाब से जरूर बेचते है। मिडिया भी इन गरीबो को कोई महत्व नहीं देता है । समाजिक संस्था भी इन लोगो के लिए आवाज नहीं उठाती है। इस महिला के चित्र को देखिये यह कही से भी आत्म हत्या का मामला लग रहा है ? अब आप ही न्याय किजीयै शार्दूल के कलम से's photo. शार्दूल के कलम से's photo. शार्दूल के कलम से's photo. शार्दूल के कलम से's photo.

कानून औऱ प्रशासन मे सदैव हैसियत औऱ रुपया के हिसाब से ही न्याय होता रहा है आगे भी ऐसा ही होगा। गरीब व्यक्ति का हत्या भी आत्म हत्या बन जाता है औऱ अमीर व्यक्ति का आत्म हत्या भी हत्या मे बदल जाता है। मैंने आत्म हत्या के केस को हत्या के रूप बदलते औऱ परिवारो को बरबाद होते देखा है औऱ हत्या के पिडीत परिवारो को न्याय माँगते दर दर ठोकर खाते देखा है। गरीब व्यक्ति के लिए कोई राजनीतिक दल भी आवाज नहीं उठाता है ,हाँ उनका नाम अपने हिसाब से जरूर बेचते है। मिडिया भी इन गरीबो को कोई महत्व नहीं देता है । समाजिक संस्था भी इन लोगो के लिए आवाज नहीं उठाती है। इस महिला के चित्र को देखिये यह कही से भी आत्म हत्या का मामला लग रहा है ? अब आप ही न्याय किजीयै

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