सोमवार, 10 अक्टूबर 2016

किसी के मौत पर राजनीति कैसे होती है, इसी से समझिये नेताजी सुभाष चंद्र बोस के मौत का रहस्य आज भी राजनीति मे जीवित है, इसे नेता आज भी भुना रहे है।कितने जाँच कमीशन बनी। लेकिन शयामा प्रसाद मुर्खिजी और दीन दयाल उपाध्याय के मौत(हत्या) का रहस्य कोई नहीं जानना चहता ,उनके नाम ले कर सत्तारूढ़ हुई राजनीतिक दल भी नहीं कयोकि अब नाम से कोई वोट बैंक नहीं है, अब सत्तारूढ दल न तो इनके रहस्यमीय हत्याओ का जाँच की माँग कर रहे है न कोई जाँच आयोग. ही बैठा रहे है। केवल उनका नाम बेच रहे है। कोई भी आर्दश नेता किसी भी राजनीतिक दलों के लिए सत्ता का सीढी मात्र होता है। चाहे वह महात्मा गांधी हो, नेताजी हो, शयामा प्रसाद मुर्खिजी हो या दीन दयाल उपाध्याय हो। इनके मौत का रहस्य केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम मात्र है, नैतिकता औऱ सिद्धांत का अनुसरण नहीं । शार्दूल के कलम से's photo. शार्दूल के कलम से's photo. शार्दूल के कलम से's photo.

किसी के मौत पर राजनीति कैसे
होती है, इसी से समझिये नेताजी सुभाष चंद्र बोस के मौत का रहस्य आज भी राजनीति मे जीवित है, इसे नेता आज भी भुना रहे है।कितने जाँच कमीशन बनी। लेकिन शयामा प्रसाद मुर्खिजी और दीन दयाल उपाध्याय के मौत(हत्या) का रहस्य कोई नहीं जानना चहता ,उनके नाम ले कर सत्तारूढ़ हुई राजनीतिक दल भी नहीं कयोकि अब नाम से कोई वोट बैंक नहीं है, अब सत्तारूढ दल न तो इनके रहस्यमीय हत्याओ का जाँच की माँग कर रहे है न कोई जाँच आयोग. ही बैठा रहे है। केवल उनका नाम बेच रहे है। कोई भी आर्दश नेता किसी भी राजनीतिक दलों के लिए सत्ता का सीढी मात्र होता है। चाहे वह महात्मा गांधी हो, नेताजी हो, शयामा प्रसाद मुर्खिजी हो या दीन दयाल उपाध्याय हो। इनके मौत का रहस्य केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम मात्र है, नैतिकता औऱ सिद्धांत का अनुसरण नहीं ।

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